‘कुत्ता कांड’! एडमिट कार्ड में अभ्यर्थी की फोटो की जगह छप गई डॉग की तस्वीर

आलोक सिंह
आलोक सिंह

सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करना अक्सर धैर्य का खेल होता है. फॉर्म भरिए, दस्तावेज अपलोड कीजिए, सालों इंतजार कीजिए… और फिर एडमिट कार्ड डाउनलोड कीजिए.

लेकिन बिहार के रोहतास में एक अभ्यर्थी के साथ जो हुआ, वह सिस्टम की विडंबना का अनोखा नमूना बन गया. जब उसने अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया तो नाम सही था, रोल नंबर सही था, परीक्षा केंद्र सही था.

गलत था तो सिर्फ एक चीज. फोटो. क्योंकि वहां उसकी जगह एक dog की तस्वीर लगी हुई थी.

एडमिट कार्ड देखते ही उड़ गए होश

रोहतास जिले के बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के धवा गांव के रहने वाले रितेश कुमार ने साल 2022 में सिविल कोर्ट में चपरासी पद के लिए आवेदन किया था. लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भर्ती परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी हुआ. रितेश ने सामान्य प्रक्रिया के तहत वेबसाइट से अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया. लेकिन जैसे ही उन्होंने दस्तावेज को गौर से देखा, वह हैरान रह गए.

नाम उनका. जन्मतिथि उनकी. परीक्षा केंद्र उनका. लेकिन फोटो की जगह एक कुत्ते की तस्वीर. एक पल के लिए उन्हें लगा शायद कोई तकनीकी गड़बड़ी है. लेकिन बार-बार डाउनलोड करने के बाद भी वही तस्वीर सामने आती रही.

सिस्टम की गलती या डिजिटल मजाक?

इस घटना के बाद रितेश का गुस्सा स्वाभाविक है. उनका कहना है कि उन्होंने आवेदन के समय सभी दस्तावेज और फोटो सही तरीके से अपलोड किए थे. अब जब एडमिट कार्ड में इस तरह की गलती सामने आई है, तो जिम्मेदारी पूरी तरह भर्ती बोर्ड की बनती है.

रितेश ने इस मामले में संबंधित बोर्ड और विभाग के पास शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने मांग की है कि एडमिट कार्ड में हुई इस गंभीर त्रुटि को जल्द से जल्द सुधारा जाए ताकि उन्हें परीक्षा देने में कोई परेशानी न हो.

परीक्षा की तारीख नजदीक, चिंता बढ़ी

सिविल कोर्ट के चपरासी पद के लिए लिखित परीक्षा 15 मार्च को आयोजित होने वाली है. रितेश का परीक्षा केंद्र सहरसा में निर्धारित किया गया है. लेकिन एडमिट कार्ड में हुई इस अजीब गलती ने उनकी चिंता बढ़ा दी है. उनका कहना है कि परीक्षा में अब ज्यादा समय नहीं बचा है.

अगर गलती समय रहते ठीक नहीं हुई तो परीक्षा केंद्र पर उन्हें दिक्कत हो सकती है. क्योंकि एडमिट कार्ड ही वह दस्तावेज है जिसके आधार पर परीक्षा हॉल में प्रवेश मिलता है.

भर्ती प्रक्रिया पर फिर उठे सवाल

यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी नहीं है. यह भर्ती प्रक्रिया और ऑनलाइन आवेदन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है. डिजिटल सिस्टम को पारदर्शिता और सुविधा के लिए बनाया गया था.

लेकिन जब तकनीकी गड़बड़ियां इस तरह सामने आती हैं, तो उम्मीदवारों का भरोसा कमजोर पड़ता है. भर्ती एजेंसियों को डेटा वेरिफिकेशन और एडमिट कार्ड जनरेशन की प्रक्रिया को और मजबूत बनाना होगा. क्योंकि एक छोटी तकनीकी गलती किसी उम्मीदवार के करियर पर भारी पड़ सकती है.

सोशल मीडिया पर बन गया मजाक

जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं. कुछ लोगों ने इसे सिस्टम की गंभीर लापरवाही बताया. तो कुछ लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि “डिजिटल इंडिया में कभी-कभी डिजिटल मजाक भी हो जाता है.” हालांकि रितेश के लिए यह मामला मजाक नहीं, बल्कि करियर से जुड़ा गंभीर मुद्दा है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि भर्ती बोर्ड इस गलती को कितनी जल्दी ठीक करता है.

“7 घंटे हवा में… फिर ‘U-Turn’! लौट आई दिल्ली-मैनचेस्टर फ्लाइट”

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